🟢 गरीब हल्क की कहानी 🟢
एक झोपड़ी वाले हल्क का सफर
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💚 हल्क (राजू)
मैं एक गरीब मजदूर हूं... मेरे पास कुछ नहीं है, बस यह टूटी झोपड़ी है। लेकिन मेरे अंदर एक अजीब ताकत छिपी है जो गुस्से में बाहर आती है।
👨🌾 ग्रामीण 1
अरे राजू! आज फिर मजदूरी करने जा रहा है? तुम्हारी झोपड़ी तो बारिश में गिर जाएगी।
💚 हल्क (राजू)
क्या करूं भाई... मेरे पास और कोई रास्ता नहीं है। मैं मेहनत करके ही अपना और अपनी बूढ़ी माँ का पेट भरता हूं।
😈 जमींदार शर्मा
अबे राजू! आज तक का किराया दे वरना तेरी झोपड़ी तोड़ दूंगा! और तेरी बूढ़ी माँ को सड़क पर फेंक दूंगा!
💚 हल्क (राजू)
सेठ जी... बस एक हफ्ता और दे दीजिए। मैं काम कर रहा हूं, पैसे दे दूंगा।
😈 जमींदार के गुंडे
बॉस ने कहा है झोपड़ी तोड़ दो! चलो लड़को, तोड़ फोड़ शुरू करो!
💚 हल्क (राजू - गुस्सा)
नहीं! मेरी माँ अंदर है! रुक जाओ वरना... वरना मैं... मुझे गुस्सा मत दिलाओ!
💚💪 हल्क (Transformation)
HULK... SMASH!!! तुम लोगों ने बड़ी गलती की! अब HULK तुम्हें नहीं छोड़ेगा!
😈 गुंडे (डरते हुए)
ये... ये क्या हो गया! ये तो हरा दानव बन गया! भागो यहाँ से!
💚💪 हल्क
अब जमींदार शर्मा की बारी! HULK तुम्हारी दुष्टता खत्म करेगा! तुमने गरीबों को बहुत सताया!
😈 जमींदार शर्मा
माफ कर दो! मैं सब गरीबों को उनकी जमीन वापस कर दूंगा! अब कभी किसी को नहीं सताऊंगा!
👨🌾 ग्रामीण 2
राजू भैया! आपने हम सबको बचा लिया! अब हमारे पास अपने घर हैं! आप हमारे हीरो हो!
💚 हल्क (राजू - वापस नॉर्मल)
मैं तो बस एक गरीब इंसान हूं... लेकिन जब भी किसी पर अन्याय होता है, तो मेरे अंदर का HULK जाग जाता है।
💚 हल्क (राजू)
याद रखना... चाहे कोई कितना भी गरीब क्यों न हो, अगर उसके अंदर हिम्मत और इमानदारी है, तो वो सबसे ताकतवर है। मैं हमेशा गरीबों और बेबसों की मदद करता रहूंगा!